इस दनय क महन परष और महलओ क पस असधरण à¤à¤—य, परतठय अनà¤à¤µ नह थ। उनहन ज कछ कय वह यह थ क उन सबन à¤à¤• सतरवकय क अनसर जवन जय : ज चज रसत म बध बनकर खड हत ह, वह रसत बन जत ह। इस सरल सदधत क इरद-गरद नरमत दरशन क आवषकर 2,000 वरष स ठपहल हआ थ और तब स आज तक यदध क मदन और सघठन क बरडरम म इसक उपयगत सबत हई ह। अतररषटरय सतर पर खयतपरपत मरकटग गर और बसटसलग लखक रयन हलड न अपन पसतक द ऑबसटकल इज द व म, इस à¤à¤² दय गठमहन फरमल क आज क ससर म सफल हन क लठफर स परà¤à¤·à¤¤ कय ह और उजगर कय ह क कस : जन ड. रकफलर न वपरत परसथतय म अवसर दख और मद क दर म ठसमदध बन गठगध न अपन कमजरय क सथ खल और बरटश समरजय क सनय शकत क तकत क ह इसक कमजर बन दय सटव जबस न असà¤à¤µ क सà¤à¤µ कर दखय अपन धरणओ क परबधत कर। यह पहचन क आप चज क कब बदल सकत ह। अपन करय क नरदशत कर। और हर बध क अपन लठम परवरतत करन सख।