
Biraj Bahu
(Hardcover)
Sarat Chandra Chattopadhyay,
Abhishek Publications (Publisher)
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हà¥à¤—ली जिले का सपà¥à¤¤à¤—à¥à¤°à¤¾à¤®-उसमें दो à¤à¤¾à¤ˆ नीलामà¥à¤¬à¤° व पीतामà¥à¤¬à¤° रहते थे। नीलामà¥à¤¬à¤° मà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ जलाने, कीरà¥à¤¤à¤¨ करने, ढोल बजाने और गांजे का दम à¤à¤°à¤¨à¥‡ में बेजोड़ था। उसका कद लमà¥à¤¬à¤¾, बदन गोरा, बहà¥à¤¤ ही चà¥à¤¸à¥à¤¤, फà¥à¤°à¥à¤¤à¥€à¤²à¤¾ तथा ताकतवर था। दूसरों के के मामले में उसकी खà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¤¿ बहà¥à¤¤ थी तो गंवारपन में à¤à¥€ वह गाà¤à¤µ- -à¤à¤° में बदनाम था। मगर उसका छोटा à¤à¤¾à¤ˆ पीतामà¥à¤¬à¤° उसके विपरीत था। वह दà¥à¤°à¥à¤¬à¤² तथा नाटे कद का था। शाम के बाद किसी के मरने का समाचार सà¥à¤¨à¤•र उसका शरीर अजीब-सा हो जाता था। वह अपने à¤à¤¾à¤ˆ जैसा मूरà¥à¤– ही नहीं था तथा मूरà¥à¤–ता की कोई बात à¤à¥€ उसमें नहीं थी । सवेरे ही वह à¤à¥‹à¤œà¤¨ करके अपना बसà¥à¤¤à¤¾ लेकर अदालत चला जाता था। पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ तरफ à¤à¤• आम के पेड़ के नीचे बैठकर वह दिनà¤à¤° अरà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ लिखा करता था। वह जो कà¥à¤› à¤à¥€ कमाता था, उसे घर आकर सनà¥à¤¦à¥‚क में बंद कर देता था। रात को सारे दरवाजे-खिड़कियां बनà¥à¤¦ कर और उनकी कई बार जाà¤à¤š करने के बाद वह सोता था।
